दोषारोपण करनेवाले भी कम दोषी नहीं

पिछले दिनों आपके अखबार के पाठक मत स्तंभ के खास पत्र के तहत छपे मंगल सिंह मुंडा के मत से मैं इत्तेफाक नहीं रखती. मैं उनसे पूछना चाहूंगी कि अगर लाल पाड़ की साड़ी में मरियम की प्रतिमा को देखकर आपकी संस्कृति का लोप हो रहा है तो आप अपने पारंपरिक परिधान छोड़कर कोट-पैंट क्यों […]

पिछले दिनों आपके अखबार के पाठक मत स्तंभ के खास पत्र के तहत छपे मंगल सिंह मुंडा के मत से मैं इत्तेफाक नहीं रखती. मैं उनसे पूछना चाहूंगी कि अगर लाल पाड़ की साड़ी में मरियम की प्रतिमा को देखकर आपकी संस्कृति का लोप हो रहा है तो आप अपने पारंपरिक परिधान छोड़कर कोट-पैंट क्यों पहन रहे हैं? आपके बच्चे पारंपरिक पहनावे को छोड़कर जींस, टी-शर्ट और टॉप क्यों अपना रहे हैं?

आपके बच्चे अंगरेजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, पिज्जा-बर्गर खा रहे हैं, तब आपकी संस्कृति का लोप क्यों नहीं हो रहा है? आपका समुदाय प्रकृति के करीब होने का दावा करता है, लेकिन आज आपका खान-पान, रहन-सहन आदि प्रकृति के कितना करीब रह गया है? दूसरों पर आरोप लगाने से पहले एक बार खुद अपने परिवार और समाज नजर डाल लीजिए, फर्क मालूम पड़ जायेगा.

अमिति कोड़ा, गोइलकेरा, पश्चिमी सिंहभूम

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