अमेरिकी गुरूर एक दिन टूटेगा जरूर

कुछ देशों को अपने चंगुल में फांसने के बाद अमेरिका का अहं इतना बढ़ गया कि वह बाकी सभी देशों को अपने आगे तुच्छ समझने लगा है. उसकी खुशफहमियों को एक करारे तमाचे की जरूरत थी, जो उसके खुद के पापों से ही पूरी हो रही है. दूसरी ओर भारत की सरकार को अपमान पीने […]

कुछ देशों को अपने चंगुल में फांसने के बाद अमेरिका का अहं इतना बढ़ गया कि वह बाकी सभी देशों को अपने आगे तुच्छ समझने लगा है. उसकी खुशफहमियों को एक करारे तमाचे की जरूरत थी, जो उसके खुद के पापों से ही पूरी हो रही है. दूसरी ओर भारत की सरकार को अपमान पीने की आदत पड़ रही थी.

इसका फायदा उठाने में अमेरिका तो क्या, पाकिस्तान भी पीछे नहीं था. पर भारतीय राजनयिक के साथ जो शर्मनाक कृत्य हुआ, उसने सभी सीमाएं लांघ दी हैं और भारत को सारी पुरानी चुप्पी एक साथ तोड़नी पड़ रही है.

यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जिल्लत झेलने की बारी अब अमेरिका की है. पूरा देश गुस्से में है. इस प्रतिक्रि या की उसने कल्पना भी नहीं की होगी. भारत को और कड़ा बदला लेते हुए मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहिए, ताकि अमेरिका की आंखें खुलें.

डॉ हेम श्रीवास्तव, बरियातू, रांची

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