धारा के विपरीत और हर रोज सुर्खियों में रह कर कन्हैया एक बड़ा शेर जैसा बन गया लगता है़ इससे पूर्व अन्ना आंदोलन के सहारे केजरीवाल भी राजनीति अपनी जगह बना चुके हैं. माना कि साम्यवादी सिद्धांत खरा सोना है, लेकिन इसके नेताओं ने जो इसकी मिट्टी पलीद की है, शायद ऐसी किसी ने नहीं की़ इसलिए तो आज वे हीरो से जीरो हो चुके हैं. राहुल गांधी भी कुछ नया करके अपनी पार्टी में नये प्राण फूंकना चाहते हैं. अब ये उभरते नेता कितना और क्या कर पायेंगे, यह तो वक्त ही बतायेगा़
वेद प्रकाश, दिल्ली
