बदलाव के लिए सृजन जरूरी है. अगर तकनीक आधारित सृजनशीलता से भ्रष्टाचार का खात्मा हो, तो क्या कहने? झारखंड जैसे पिछड़े राज्य में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है. इससे न सिर्फ राज्य की बदनामी हो रही है, बल्कि विकास भी प्रभावित हो रहा है. ऐसे में बदलाव सबसे अधिक जरूरी है. हम देश-दुनिया में हो रहे तकनीकी विकास व नवोन्मेषी (इनोवेटिव) विचारों की अनदेखी नहीं कर सकते.
अत्याधुनिक तकनीकों ने सरकारों को पारदर्शी शासन मुहैया कराने की दिशा में बड़ी सहायता की है. यह समय की मांग भी है. कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे, इसके लिए लाभुकों का डिजिटल डाटा बेस तैयार कर समय-समय पर उसे अद्यतन किये जाने की जरूरत है. वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा आवास, आंगनबाड़ी व अन्य योजनाओं के सही क्रियान्वयन में इससे मदद मिल सकती है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है. यह स्वागतयोग्य कदम है.
राज्य में पारदर्शी शासन के लिए गुड गवर्नेस के साथ अच्छा आउटपुट देना भी जरूरी है. इसके लिए सरकारी तंत्र को मजबूत करना होगा. हर स्तर पर पारदर्शिता बरतनी होगी, ताकि दोषियों का आसानी से पता चल सके. ऐसा होने पर लोगों में सरकार के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा. साथ ही सरकारी राशि में घपला भी नहीं हो सकेगा. क्या यह सही नहीं है कि राज्य के स्कूलों में मध्याह्न् भोजन और शिक्षकों की उपस्थिति के बारे में कोई पूछनेवाला नहीं है. कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की बानगी इस बात से जाहिर होती है कि समय-समय पर ऐसी टिप्पणियां आती रहती हैं कि केंद्र से एक रुपया चलता है तो लाभुकों के पास दस पैसे ही पहुंच पाते हैं.
यही हाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन का भी है. इन बेहद गंभीर प्रशासनिक खामियों को पाटने में तकनीक व नवाचार की मदद लेना कारगर साबित होगा. मुख्यमंत्री को दूरदर्शिता दिखाते हुए सिस्टम में ऐसे बदलावों को तत्काल लागू करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए. साथ ही राज्य के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को भी इसे पूरे मन से अपनाना होगा. ये लोग पूरी जवाबदेही और ईमानदारी के साथ दायित्वों का निर्वहन करें, ऐसी जनता की अपेक्षा है.
