समाजसेवी अन्ना हजारे के क्रि याकलाप इन दिनों मन में कई तरह की शंकाएं पैदा करते हैं. रालेगणसिद्धी में अनशन पर बैठे अन्ना ने कहा था कि उनके मंच पर राजनीतिक दल से जुड़ा कोई भी शख्स नहीं आयेगा. जाहिर तौर पर उनकी मंशा राजनीतिक दलों को अपने निजी हित के लिए मंच का उपयोग न करने देने, और मंच को जनलोकपाल तक केंद्रित रखने की रही होगी.
फिर सवाल उठता है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ खुल कर मंच साझा करनेवाले पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को रियायत क्यों बख्शी? बेशक वीके सिंह किसी भी दल से जुड़े हुए नहीं हैं, पर क्या उन्हें भी वक्त की नजाकत को देखते हुए अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के पूर्व सहयोगियों पर निशाना साधने से परहेज नहीं करना चाहिए था?
अंकित मुत्रीजा, खानपुर, दिल्ली
