जनसुविधा का ख्याल रखें मॉल

राजधानी रांची में शॉपिंग कांप्लेक्स और मॉल संस्कृति नयी ऊंचाइयों पर है. रात के समय शहर के महात्मा गांधी मार्ग की चिकनी सड़क और उसके किनारे चमचमाती गगनचुंबी इमारतें, शॉपिंग मॉल लोगों के समृद्ध होते जीवन स्तर को बयान करते हैं. राजधानी बनने के बाद जो शॉपिंग कांप्लेक्स नये खुले हैं, वे आगंतुकों की सुविधा […]

राजधानी रांची में शॉपिंग कांप्लेक्स और मॉल संस्कृति नयी ऊंचाइयों पर है. रात के समय शहर के महात्मा गांधी मार्ग की चिकनी सड़क और उसके किनारे चमचमाती गगनचुंबी इमारतें, शॉपिंग मॉल लोगों के समृद्ध होते जीवन स्तर को बयान करते हैं. राजधानी बनने के बाद जो शॉपिंग कांप्लेक्स नये खुले हैं, वे आगंतुकों की सुविधा के ख्याल से ठीक हैं, लेकिन पुराने शॉपिंग कांप्लेक्स इस लिहाज से नयेवालों से पिछड़ते नजर आ रहे हैं.

ऐसे ही एक कांप्लेक्स में जाना, कड़वा अनुभव रहा. कार की पार्किग का शुल्क दो घंटे के लिए दस रुपया देना महंगा लगा. आगे पता चला कि वहां लिफ्ट तो है, लेकिन वह कांप्लेक्स कीदुकानों का सामान ढोने के काम आ रही है. ऐसे में हमें चौथे तल्ले पर सीढ़ियां चढ़ कर पहुंचना पड़ा. यहां जनसुविधा का खयाल किसी को है या नहीं?

अखिलेश्वर चतुर्वेदी, मोरहाबादी, रांची

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