जाति-धर्म की राजनीति अस्वीकार्य

भारत विश्व के महानतम लोकतांत्रिक देशों में से एक है. यहां का संविधान हम सबको एक सूत्र में बांधे हुए है. यहां जातिवाद, संप्रदायवाद, छुआछूत आदि का कोई स्थान नहीं रह गया है और जनता में इन बातों को लेकर जागरूकता भी आ रही है. दुर्भाग्यवश भारत के कुछ राजनीतिक दल अपने को धर्मनिरपेक्ष दल […]

भारत विश्व के महानतम लोकतांत्रिक देशों में से एक है. यहां का संविधान हम सबको एक सूत्र में बांधे हुए है. यहां जातिवाद, संप्रदायवाद, छुआछूत आदि का कोई स्थान नहीं रह गया है और जनता में इन बातों को लेकर जागरूकता भी आ रही है.

दुर्भाग्यवश भारत के कुछ राजनीतिक दल अपने को धर्मनिरपेक्ष दल होने की रट लगाते हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद आदि को बार-बार सांप्रदायिक पार्टी/संगठन बता कर सांप्रदायिकता रूपी अग्नि को हवा देते हैं.

भाजपा या उसके नेता किस मंच से घोषणा करते हैं कि वे किसी विशेष संप्रदाय को लेकर राजनीति करते हैं? अब भारत जैसे परिपक्व लोकतांत्रिक देश में विकास की राजनीति को ही जनता स्वीकार करती है. जाति-धर्म की राजनीति करनेवाले दलों को जनता ठुकरा रही है.

जय किशोर पांडेय, दैहर, हजारीबाग

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