राहुल गांधी को अपनी दादी इंदिरा गांधी, पिता राजीव गांधी और अपने खून की चिंता व भय तो है, मगर उन्हें देश के शहीद-ए-आजम भगत सिंह और अन्य हजारों शहीदों, समाजसेवियों, सैनिकों, पत्रकारों, नेताओं और निर्दोष नागरिकों के खून और कुर्बानी की कोई परवाह नहीं है. खुद को याद करने से पहले दूसरों को याद करना ही तो महानता होती है, मगर दुर्भाग्य से उन्हें यह सब दिखायी ही कहां देता है?
न जाने कितने निदरेष आतंकवाद-माओवाद के शिकार होते जा रहे हैं. देश की रक्षा में सीमा पर तैनात हमारे जवानों के सिरों का आज तक कोई हिसाब नहीं है. इसलिए हिंदी के प्रसिद्ध लेखक यशपाल ने अपनी कहानी .दु:ख का अधिकार. में ठीक ही कहा है कि अमीर की मौत पर तो लोग महीनों आंसू बहाते हैं, मगर बेचारे गरीब की मौत को मौत ही न समझ कर उसे कोसा तक जाता है.
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली
