।।बृजेंद्र दुबे।।
(प्रभात खबर, रांची)
अब लो भइया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मुफ्त की सलाह दे डाली है कि हिंदुओं को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करना चाहिए. आरएसएस वाले कहते हैं कि देश में जनसांख्कीय असंतुलन पर काबू पाने के लिए हर हिंदू को तीन-चार बच्चे पैदा करने चाहिए. इस खबर से कुंवारे गजोधर बहुत खुश दिखे. सुबह-सुबह मैं पत्नी के आदेश पर घर की सफाई में जुटा था, तो चाय पीने के बहाने गजोधर पधारे. बोले- अरे भाई मेरे लिए भी चाय में पानी बढ़वा दीजिए. मेरा हाल देख शुरू हो गये. देखिए आज अगर परिवार बढ़ाये होते.. चार-पांच बेटे-बेटियां होते तो फटाफट घर साफ हो जाता.
आपको हाथ भी लगाना न पड़ता. मैंने पूछा, गजोधर जी, बताइए कैसे आना हुआ?.. जी कुछ खास नहीं, बस यूं ही चाय पीने का मूड बना तो सोचा कि आज आपको उपकृत किया जाये. आप तो जानते ही हैं कि मेरा हाल टीवी धारावाहिक .तारक मेहता का उलटा चश्मा. के पत्रकार पोपट लाल जैसा हो गया है. उम्र बीती जा रही है, लेकिन अब तक एक अदद शादी भी नहीं हो पायी. ऊपर से कोढ़ में खाज की तरह आरएसएस वालों का फरमान आ गया है कि खूब बच्चे पैदा करो. मैं सोच नहीं पा रहा हूं कि देश के लिए मैं अपना योगदान कैसे करूं? यही ऊहापोह लेकर आपके पास आना पड़ा.
तब तक पत्नी ने चाय थमाया और बोली- गजोधर भाई आप दुनिया के सबसे सुखी प्राणी हैं. आपका एक ही कष्ट है कि आपकी शादी नहीं हुई. जिसकी शादी हुई है, उसके सामने तो अनगिनत दुख हैं. देखिए न जिन्होंने (आरएसएस) हिंदुओं से खूब बच्चे पैदा करने को कहा है, वे लोग खुद तो शादी करते नहीं.. उनका अपना घर-संसार होता नहीं, उन्हें क्या मालूम कि गृहस्थ का दर्द क्या होता है. बच्चे पैदा करने में ही बहादुरी नहीं है. उनको अच्छा इनसान बनाने में मेहनत के साथ पैसा भी खर्च होता है. ऐसा तो है नहीं कि बच्चे पैदा करते जाओ और आरएसएस की शाखा में भेज दो. अगर उन्हें हिंदुओं की इतनी ही चिंता है, तो पहले खुद शादी करें. घर बसायें. तब पता चलेगा कि आटे-दाल का क्या भाव है? कहने और करके दिखाने में फर्क होता है.
गजोधर एकटक मेरी पत्नी की तरफ देखते रह गये. उनकी चाय भी ठंडी हो चुकी थी. मेरी तरफ मुखातिब होकर बोले, भाभी जी सही कह रही हैं. आज की महंगाई में एक बच्च पालना-पोसना ही इतना दुष्कर है, तो चार-पांच पैदा करने पर तो तेल ही निकल जायेगा. सही ही कहा गया है- जिनके पांव न फटी बिवाई, वो क्या जानें पीर पराई..! मुङो समझ में आ गया है कि क्यों नहीं नरेंद्र मोदी ने शादी की. शादी की होती तो आज पीएम पद के उम्मीदवार नहीं होते, गृहस्थी का गाड़ी खींच रहे होते. आलू-प्याज के इंतजाम में जिंदगी स्वाहा कर रहे होते. इसलिए आरएसएस वालों, आपकी सलाह मैं तो नहीं मानूंगा. अब मेरी भी शादी का प्लान कैंसिल.
