प्रभात खबर में विगत 25 अक्तूबर 2013 को सन्नी दयाल शर्मा के लिखे पत्र की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा. इसमें उन्होंने कहा है कि भाषा की परिभाषा यह है कि उसकी अपनी लिपि होती है, जबकि बोली की अपनी लिपि नहीं होती है.
उनकी जानकारी की लिए मैं बताना चाहूंगा कि हमारे देश की उन्नत मानी जानेवाली भाषा हिंदी और यहां तक कि संस्कृत की भी अपनी लिपि नहीं हैं. ये आज भीदेवनागरी लिपि में ही लिखी जाती हैं. जहां तक शिक्षक नियुक्ति का सवाल है, तो यह सरकार की इच्छा पर है कि कब और कैसे करें.
वैसे भी इस खिचड़ी सरकार से अधिक उम्मीद करना बेकार है. झारखंड को एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार की नितांत आवश्यकता है. ये सभी राज्यवासियों को समझने में जितनी देर लगेगी, उतना ही इस राज्य, उसके संसाधनों और जनता का बुरा होगा.
महादेव महतो, ई–मेल से
