बेरोजगारी बढ़ाती शिक्षा पद्धति

वर्तमान शिक्षा पद्धति नौकरी कराने के सिवा और कोई योग्यता प्रदान नहीं करती है. होना तो यह चाहिए था कि छात्रों को विद्यालय से ही ऐसी शिक्षा मिलती कि वे अपने पैरों पर खड़े होते और उनको नौकरी का मोहताज नहीं होना पड़ता. आज हर साल लाखों छात्र शिक्षित बेरोजगारों की भीड़ में शामिल हो […]

वर्तमान शिक्षा पद्धति नौकरी कराने के सिवा और कोई योग्यता प्रदान नहीं करती है. होना तो यह चाहिए था कि छात्रों को विद्यालय से ही ऐसी शिक्षा मिलती कि वे अपने पैरों पर खड़े होते और उनको नौकरी का मोहताज नहीं होना पड़ता. आज हर साल लाखों छात्र शिक्षित बेरोजगारों की भीड़ में शामिल हो रहे हैं.

जो टॉपर हैं, उनको तो कहीं कहीं प्लेसमेंट मिल जायेगा, लेकिन जो 50} या उससे कुछ आगेपीछे अंक प्राप्त कर स्नातक हुए हैं, वे कहां जायेंगे? नौकरी तो मिलेगी नहीं. इधर परिवार की जिम्मेदारी भी अब उस पर पड़ती है. दूरदूर तक कोई रास्ता नजर नहीं आता.

क्या मनरेगा से उसकी समस्या हल होगी? क्या इसी के लिए उसने बीए पास किया है? वह फ्रांस और चीन की क्रांति का इतिहास पढ़ चुका है, लेकिन क्या यह सब उसे रोजगार दिलाने में मददगार साबित हो सकता है?

(भुपू सिंह, रांकी कलां, पलामू)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >