सूचकांकों में सुधार की हो कोशिश

वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में भारत जैसे लोकतांत्रिक गणराज्य का 10 पायदान नीचे आ जाना बिल्कुल भी अच्छे संकेत नहीं हैं. यह रिपोर्ट साफ बताती है कि पिछले एक साल में भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति कुछ ठीक नहीं रही है. अब यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार अवश्य ही इसमें सुधार […]

वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में भारत जैसे लोकतांत्रिक गणराज्य का 10 पायदान नीचे आ जाना बिल्कुल भी अच्छे संकेत नहीं हैं. यह रिपोर्ट साफ बताती है कि पिछले एक साल में भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति कुछ ठीक नहीं रही है. अब यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार अवश्य ही इसमें सुधार के लिए सभी जरूरी कदम उठायेगी. इस रिपोर्ट को समझना और इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.
जिसके लिए सबसे पहले इस रिपोर्ट के आधार को समझना होगा और वह आधार है सरकार का कामकाज, चुनावी प्रक्रिया, बहुलतावाद, राजनीतिक भागीदारी, राजनीतिक संस्कृति और नागरिक स्वतंत्रता. अगर इन आधारों में सकारात्मक सुधार कर लिया जाये, तो पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि सूचकांक में भी सुधार अवश्य होगा. इसके साथ ही बाकी जितने भी वैश्विक स्तर पर सूचकांक जारी किये जाते हैं, उन सब में भी सुधार के लिए हमारी सरकार को प्रयास करना चाहिए.
अमर कुमार यादव, धनबाद, झारखंड

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