जब गरीब ही नहीं रहेंगे!

सुरेश कांत वरिष्ठ व्यंग्यकार drsureshkant@gmail.com सरकार किसी भी दल की हो, पहला काम गरीबी दूर करने का ही करती है. फिर चाहे वह गरीबों को मिटाकर करे या गरीबी का नाम बदलकर. यह अलग बात है कि सत्तर सालों में और जो भी काम हुए हों, पर गरीबी दूर करने का नहीं हो पाया. गरीब […]

सुरेश कांत
वरिष्ठ व्यंग्यकार
drsureshkant@gmail.com
सरकार किसी भी दल की हो, पहला काम गरीबी दूर करने का ही करती है. फिर चाहे वह गरीबों को मिटाकर करे या गरीबी का नाम बदलकर. यह अलग बात है कि सत्तर सालों में और जो भी काम हुए हों, पर गरीबी दूर करने का नहीं हो पाया. गरीब हैं ही इतने हठी कि सरकार की एक नहीं चलने देते. फिर भी सरकार कोशिश तो करती ही है और हम उम्मीद करते हैं कि एक न एक दिन वह कामयाब भी अवश्य होगी.
इसके लिए उसे करना भी क्या है? गरीबी के मानक निर्धारित करने के लिए सरकार द्वारा ही गठित की गयी तेंदुलकर समिति के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में सत्ताइस रुपये और शहरी क्षेत्रों में तैंतीस रुपये से कम खर्च करनेवाला व्यक्ति गरीब कहलाने का अधिकारी है. क्रमश: छब्बीस और बत्तीस रुपये दैनिक आय वालों को तो उनकी आय में एक-एक रुपया बढ़ाकर ही फौरन अमीरों की श्रेणी में लाया जा सकता है.
उस दिन की उम्मीद में मैं कल्पना करता हूं कि तब हमारे यहां भिखारी भी अमीर हुआ करेंगे. लेकिन भला तब वे भीख कैसे मांगेंगे? यह तो कह नहीं सकते कि साहब, बहुत गरीब हूं, कुछ पैसे दे दो. शायद वे कहें कि साहब, बहुत कम अमीर हूं, दो दिन से केवल छब्बीस (या बत्तीस) रुपये ही खर्च किये हैं, कुछ पैसे दे दो.
या कल को आपकी काम वाली बाई झाड़ू लगाकर उठ खड़ी हो और बोले कि मेम साहब, अब पोंछा आप लगाओ, क्योंकि अब तो मैं भी अमीर हूं, सारा काम क्या मैं ही करूंगी? और शायद आपको ले जा रहा रिक्शावाला भी रिक्शे से उतरकर बोले कि भाई, अब आधी दूर तक आप चलाओ, क्या सारी मेहनत अपने भाई से ही करवाओगे?
गरीब नहीं रहेंगे, तो फिल्मों की स्टोरी-लाइन भी बदलनी पड़ जायेगी. गरीब लड़की और अमीर लड़के या अमीर लड़की और गरीब लड़के वाला प्यार तो हो ही नहीं पायेगा. अमीर हीरोइन का बाप गरीब हीरो को पैसे से खरीदने के बारे में सोचेगा तक नहीं.
अमीर सेठ किसी गरीब हीरो का खेत भी गिरवी नहीं रख पायेगा. तब गरीबी की वजह से कोई ‘गरीब’ जान भी नहीं दे पायेगा. सबसे बड़ी मुसीबत बेचारे किसानों को होगी, जिन्हें आत्महत्या करने के लिए गरीबी से इतर कोई अन्य वजह तलाशनी पड़ेगी.
फिर सरकार अपनी कई योजनाएं भी बंद कर देगी. वह कुछ समय बाद बहुत जल्द अमीर बनने जा रहे इन गरीबों पर टैक्स भी लगा देगी. उस टैक्स से जो पैसा आयेगा, उसका सदुपयोग भी घोटालों के रूप में किया जायेगा. घोटाले करनेवाले नेताओं को गरीब की हाय भी नहीं लग पायेगी, क्योंकि गरीब होगा ही कहां हाय लगाने के लिए?
मजेदार बात तो यह होगी कि जब दिन का सत्ताइस रुपये कमानेवाला अमीर हुआ, तो फिर हम-आप तो बहुत अमीर हुए. हमारी इस रईसी में बस एक ही कमी रह जायेगी- हमें किसी गरीब का पेट उपलब्ध नहीं हो पायेगा लात मारने के लिए. और हां, जब गरीब नहीं होंगे, तो हम दान-पुण्य किसे करेंगे? गरीब ब्राह्मण को दान नहीं दिया, तो स्वर्ग में सीट पक्की कैसे होगी?

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