पक्ष हो या विपक्ष,भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए

अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है. शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व […]

अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है.
शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व शालीनता का ख्याल नहीं रखने से सच्ची बात भी उपहास का केंद्र बन जाती है. इस पर कोई गंभीर नहीं होता है. नेताओं को चाहिए कि उनके शब्दों के उच्चारण मानक हिंदी के करीब रहे. यद्यपि यह संभव न भी हो तो प्रयास दिखना तो चाहिए. नेताओं में भी मेधा की कमी नहीं हैं. गांधी, जयप्रकाश नारायण, श्रीबाबू, अनुग्रह बाबू, जग जीवन राम, इसी धरती की तो उपज हैं.
मुकेश कुमार मनन, पटना

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >