देर रात टीवी पर चंद्रयान-2 की गतिविधियां देख रहा था. पीएम की उपस्थिति में वैज्ञानिकों में उत्साह था. वहां उपस्थित बच्चे भी उत्साहित थे. वे बहुत कुछ सीख रहे थे. दो बार सभी ने तालियां भी बजायीं, किंतु अंतिम क्षण में माहौल ढीला पड़ गया.
इसरो के उस कक्ष का तनाव मैं साफ महसूस कर रहा था. जी भारी हो गया था, पर पीएम ने वैज्ञानिकों की हौसला अफजाई की, जो कि एक कुशल नेतृत्वकर्ता और देश के प्रमुख की खासियत के तौर पर देखा जा रहा है. पीएम के इस कदम से वहां उपस्थित लोगों का आत्मबल बढ़ा.
फिर उसी सुबह इसरो प्रमुख का पीएम से गले लग कर भावुक हो जाना देश को इमोशनल कर गया. भले ही यह अभियान पूरी तरह सफल नहीं हुआ, लेकिन इसको असफल कहना भी ठीक नहीं होगा. वगैर किसी दूसरे देश की मदद से इतना हासिल करना भी हमारे देश की ऐतिहासिक उपलब्धि है.
सत्येंद्र कुमार पांडेय, अमेठिया नगर, रांची
