स्वच्छता का सपना गांधी जयंती पर भी अधूरा

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मस्थली चंपारण की धरती है, जहां से उन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया था. वहीं ‘बापू के 150वीं जयंती वर्ष’ पर भी स्वच्छता मामले में अधूरा दिख रहा है, जिसमें मोतिहारी शहर के बीचोबीच स्थित मोती झील साफ-सुथरा पानी के लिए अब भी तरस रहा है. जबकि, गांधीजी स्वच्छता पर […]

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मस्थली चंपारण की धरती है, जहां से उन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया था. वहीं ‘बापू के 150वीं जयंती वर्ष’ पर भी स्वच्छता मामले में अधूरा दिख रहा है, जिसमें मोतिहारी शहर के बीचोबीच स्थित मोती झील साफ-सुथरा पानी के लिए अब भी तरस रहा है. जबकि, गांधीजी स्वच्छता पर काफी जोर देते थे. गांधी के स्वच्छता का सपना उनके सत्याग्रह की भूमि पर ही दिख रहा है. जबकि, मोती झील के बीच से होकर महात्मा गांधी मार्ग गुजरता है.
इससे आने-जाने वाले यात्रियों को झील के पानी से निकलने वाली दुर्गंध परेशानी करती है. इसके अलावा भी शहर के लगभग सभी नाले व गटर का पानी झील में ही आकर गिरते हैं. इससे गांधी जयंती पर भी स्वच्छता का सपना अधूरा दिख रहा है.
नितेश कुमार सिन्हा, जानपुल चौक (मोतिहारी)

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