संस्कृत एक वैज्ञानिक व कंप्यूटर फ्रेंडली भाषा है जो सभी भाषाओं की जननी है. इसमें रचित साहित्य सत्य,अहिंसा, राष्ट्रभक्ति, त्याग, परोपकार, सत्कर्म जैसी भावनाओं का विकास करती है. जन्म से लेकर मृत्युपरांत सारे कार्य इसी से संपन्न होते हैं.
किंतु आज इस भाषा से ही लोगों का मोह भंग हो रहा है. इसके लिए ही 1969 में शिक्षा मंत्रालय ने रक्षाबंधन के दिन संस्कृत दिवस मनाने की घोषणा की थी, जिससे इस भाषा का प्रचार प्रसार हो. फिर 2002 में वाजपेयीजी की सरकार में इसे सप्ताह के रूप में मनाने की घोषणा हुई.
चूंकि कोई भी देश अपनी भाषा से ही उन्नति कर सकता है, भारत की पहचान भी संस्कृत से ही होती है. इसे न जानकर ही वेद, उपनिषद आदि में भरे ज्ञान समाज को नहीं मिल रहे हैं. आज इसके उपयोग को बढ़ाने के लिए हमें हर तरह से प्रयास करने चाहिए. छात्रों में रुचि उत्पन्न करानी होगी.
नयन तिवारी, चन्नो, कहलगांव
