टीइटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के साथ हो रहा भेदभाव

राज्य सरकार कहती है कि हाइकोर्ट द्वारा शिक्षक नियोजन नियमावली रद्द कर दिया गया है, जब तक सुप्रीम कोर्ट से ‘समान काम के बदले समान वेतन’ मामले का जजमेंट नहीं आ जाता नयी नियुक्ति या नियोजन बाधित रहेगी. लेकिन, जब चुनाव का ��मय आया, तो मदरसों में 3384 साइंस व मैथ शिक्षकों की बहाली करने […]

राज्य सरकार कहती है कि हाइकोर्ट द्वारा शिक्षक नियोजन नियमावली रद्द कर दिया गया है, जब तक सुप्रीम कोर्ट से ‘समान काम के बदले समान वेतन’ मामले का जजमेंट नहीं आ जाता नयी नियुक्ति या नियोजन बाधित रहेगी.
लेकिन, जब चुनाव का समय आया, तो मदरसों में 3384 साइंस व मैथ शिक्षकों की बहाली करने की बात कहकर सरकार युवाओं को झूठा आश्वासन देने लगी. टीइटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी सरकार से जानना चाहते हैं कि यदि मदरसों में शिक्षकों का नियोजन हो सकता है, तो सामान्य विद्यालयों में क्यों नहीं?
जबकि, अभी बिहार में शिक्षकों के दो लाख से अधिक पद रिक्त हैं. सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. योग्य, प्रशिक्षित व टीइटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी सड़क पर आ गये हैं और विद्यालय में शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है. राज्य सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके.
राहुल कुमार, जनकपुर (गया)

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