विकास संबंधी गतिविधियां बढ़ाने सहित बजट में कई ऐसे प्रस्ताव हैं, जिनसे भविष्य में लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन इन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना जरूरी है.
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत मोदी सरकार के पहले आम बजट में बहुत चमत्कारिक घोषणाएं नहीं हैं, पर उसकी दिशा आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की है. साथ ही बजट से पहले जिन ‘कड़वी दवाइयों’ की चर्चा थी, वे अनुपस्थित हैं. वित्तमंत्री के सामने कमजोर अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति का संकट और बजट घाटे की चुनौती जैसी मुश्किलें हैं और औसत से बहुत कम मॉनसून से देश के कई इलाकों में सूखे के आसार हैं. इस परिस्थिति में जनता की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश एक हद तक ही हो सकती थी. सरी ओर, सरकार रेल किराये व माल ढुलाई भाड़े तथा रसोई गैस की कीमतों में पहले ही वृद्धि कर चुकी है. ऐसे में वह बजट में जनता पर बहुत अधिक बोझ डाल कर अपनी लोकप्रियता को खतरे में नहीं डाल सकती थी, क्योंकि अगले कुछ महीनों में कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं. बहरहाल, इस बजट में वित्तमंत्री ने जनता के हर वर्ग की अपेक्षाओं को थोड़ा-बहुत पूरा करने के कुछ-कुछ प्रयास किये हैं.
वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण के शुरू में ही अर्थव्यवस्था की चिंताजनक स्थिति का उल्लेख करते हुए ठोस व सुविचारित फैसले लेने और लोकलुभावन निर्णयों व निर्थक खर्चो से बचने की बात कही. वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पादन का 4.1 फीसदी तक रखने के लक्ष्य के साथ उन्होंने कई ऐसे प्रस्ताव दिये जिनसे लोगों को राहत मिलेगी. अर्थतंत्र के निचले पायदान पर खड़े वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्यक्तिगत आयकर में छूट की सीमा में बढ़ोतरी की गयी है. धारा 80सी के तहत निवेश की सीमा भी एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख कर दी गयी है.
आवास ¬ण पर ब्याज की कटौती सीमा अब दो लाख होगी. छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन देने के सरकार के दावे के अनुरूप वर्ष में 25 करोड़ से अधिक के निवेश पर 15 फीसदी निवेश भत्ते का प्रस्ताव है. शहरीकरण के विस्तार की योजना के तहत विश्व स्तर के स्मार्ट शहरों के लिए 70 अरब 60 करोड़ रुपये निर्धारित किये गये हैं. साथ ही, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के शहरों की बेहतरी के लिए नयी योजनाएं शुरू की गयी हैं. लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की घोषणा के साथ महिला सुरक्षा के मद में भी बड़ी राशि का आवंटन किया गया है. 2022 तक सभी के लिए आवास की महत्वाकांक्षी योजना के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक को 40 अरब रुपये का प्रावधान किया गया है. पूवरेत्तर के लिए कई योजनाओं के साथ अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए विशेष आवंटनों का प्रस्ताव है.
इस तरह से हर क्षेत्र व वर्ग के विकास के लिए बजटीय प्रावधान किये गये हैं. लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण है कि वित्तमंत्री ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास व विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए उपायों पर जोर दिया है. पिछले कुछ वर्षो से अर्थव्यवस्था में गिरावट और निर्णय लेने में अनावश्यक विलंब से विदेशी निवेश में कमी आ रही थी और नये क्षेत्रों में निवेश की राह अवरुद्ध थी. वित्तमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ा कर 49 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है. बीमा क्षेत्र में भी निवेश की सीमा 49 फीसदी होगी. आवास क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वर्तमान कर-व्यवस्था में आवश्यक सुधार का वादा भी किया गया है. उद्योगों के लिए बड़ी राहत की बात है कि सरकार एक स्थायी कर ढांचे को बरकरार रखेगी. हालांकि जेटली ने रेट्रोस्पेक्टिव करों से संबंधित नियमों को रद्द करने की स्पष्ट घोषणा नहीं की है. वस्तु व सेवा कर को इस वर्ष के आखिर तक लाने के वादे सहित कॉरपोरेट सेक्टर को अनेक रियायतें दी गयी हैं. आयात-निर्यात के क्षेत्र में भी सकारात्मक पहल हुई हैं.
इस बजट की एक मुख्य बात सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी के विनिवेश की है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारियों को बेच कर 634.25 अरब रुपये और निजी कंपनियों में हिस्सेदारियों को बेच कर 150 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य है. विनिवेश के इन प्रस्तावों पर संसद में विचार-विमर्श होना चाहिए. बजट में अगले तीन-चार वर्ष में विकास दर 7-8 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद व्यक्त की गयी है. ध्यान रहे, पिछली सरकार भी अपने बजट में निवेश से लेकर खर्च और नयी परियोजनाओं के संबंध में बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती थी. हाल के वर्षो में उनकी असफलताएं सामने हैं. जाहिर है, जेटली की घोषणाएं तभी कामयाब होंगी, जब इन्हें समयसीमा तय कर गंभीरता से लागू किया जाये.
