देश में विमानन संकट का समाधान करे सरकार

जेट एयरवेज के तात्कालिक बंद होने पर भारत के उड्डयन उद्योग पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं. डेक्कन, किंगफिशर और सहारा एयरलाइंस के बाद जेट चौथी कंपनी है, जिसेेे अपना परिचालन बंद करना पड़ा. खुद एयर इंडिया जैसी राष्ट्रीय कंपनी ऋण के पैसे सेेेे चल रही है. सरकार की नीलामी की कोशिश के […]

जेट एयरवेज के तात्कालिक बंद होने पर भारत के उड्डयन उद्योग पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं. डेक्कन, किंगफिशर और सहारा एयरलाइंस के बाद जेट चौथी कंपनी है, जिसेेे अपना परिचालन बंद करना पड़ा.
खुद एयर इंडिया जैसी राष्ट्रीय कंपनी ऋण के पैसे सेेेे चल रही है. सरकार की नीलामी की कोशिश के बावजूद कोई खरीदार नहीं मिला. जेट एयरवेज के हाल के मामले में कंपनी के बार-बार आग्रह के बाद भी बैंकों ने पैसे उधार देने से साफ इन्कार कर दिया.
इन कंपनियों और बैंकों में आपसी सहमति बनना बेहद जरूरी है. इनकी आखिरी उम्मीद बैंकों पर टिकी होती है. ऐसे समय में मदद करने का दायित्व बैंकों का बनता है, क्योंकि सवाल सिर्फ विमानों से यात्रियों को सफर कराने का नहीं होता है, बल्कि सवाल उन हजारों की संख्या में नौकरी कर रहे कर्मचारियों की भी है जिनकी नौकरियां पल भर में तबाह हो गयीं.
उद्देश्य कुमार, पटना

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >