पढ़ाई के प्रति बच्चों की घटती रुचि

आजकल भारत में फुटबॉल का जुनून चरम पर है, खास कर युवाओं के बीच. जिसे देखो, वही नेमार, मेसी, बेनजेमा की माला जप रहा है. कुछ समय बाद स्थिति फिर बदल जायेगी. तब लोगों के मुंह से धौनी, कोहली, स्टेन और डीविलियर्स के नाम सुनने को मिलेंगे. पर इन सारी चीजों में एक चीज हमेशा […]

आजकल भारत में फुटबॉल का जुनून चरम पर है, खास कर युवाओं के बीच. जिसे देखो, वही नेमार, मेसी, बेनजेमा की माला जप रहा है. कुछ समय बाद स्थिति फिर बदल जायेगी. तब लोगों के मुंह से धौनी, कोहली, स्टेन और डीविलियर्स के नाम सुनने को मिलेंगे. पर इन सारी चीजों में एक चीज हमेशा बरकरार रहेगी और वह है समय की बरबादी.

खेल और फिल्म के प्रति लोगों का लगाव एक हद तक ठीक है, पर वह इतना न हो कि सभी काम ठप हो जायें. आज ज्यादातर युवा शाहरुख, सचिन व दीपिका बनना चाहते हैं, लेकिन बहुत कम ही हैं, जो अमर्त्य सेन, नारायणमूर्ति या किरण मजूमदार शॉ बनने की चाहत रखते हैं. फिल्म और खेल के प्रति लगाव से आज के युवा एवं बच्चे अपना करियर चौपट करने में तुले हुए हैं. किस दिन कौन सी फिल्म रिलीज होने वाली है, यह तो उन्हें याद रहता है, लेकिन परीक्षा कब होगी यह उन्हें नहीं पता.

शर्मिला रॉय, बरकाकाना

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