विभागों में मैनपावर की कमी

देश का हर विभाग कर्मचारियों का कमी झेल रहा है. वह चाहे सेवा क्षेत्र हो, न्यायिक क्षेत्र हो, रक्षा क्षेत्र हो या शिक्षा का क्षेत्र हो, हर क्षेत्र मैनपावर की कमी का शिकार है. तभी तो सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को सरकार को आदेश देना पड़ा कि 14 दिनों के भीतर न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों […]

देश का हर विभाग कर्मचारियों का कमी झेल रहा है. वह चाहे सेवा क्षेत्र हो, न्यायिक क्षेत्र हो, रक्षा क्षेत्र हो या शिक्षा का क्षेत्र हो, हर क्षेत्र मैनपावर की कमी का शिकार है. तभी तो सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को सरकार को आदेश देना पड़ा कि 14 दिनों के भीतर न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों की नियुक्तियां की जाए.

मैनपावर की कमी के चलते देश में कार्यरत विभिन्न न्यायाधिकरण एकदम पंगु बन कर रह गये हैं. अगर यह न्यायाधिकरण देश में नहीं होते, तो अदालतों में आज जो तीन करोड़ मामले लंबित हैं, वह शायद और अधिक होते.

सरकारी हठधर्मिता के आगे अब सुप्रीम कोर्ट भी लाचार हो चला है, क्योंकि इसी अदालत ने 22 साल पहले ही तमाम न्यायाधिकरणों को एक ही मंत्रालय यानी कानून और न्याय मंत्रालय के मातहत लाने का आदेश दिया था, मगर कुछ नहीं किया गया.

अब एक पखवाड़े के अंदर रिक्त पदों को भरने को कहा गया है, जो संभव ही नहीं है, क्योंकि देश इस समय चुनाव के मोड में है. सरकार को ट्रिब्यूनल्स के क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करना होगा.

जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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