विश्व मानवता और चीन

कन्फूशियस जैसे उदात्त चरित्र वाले दार्शनिक के देश चीन के चरित्र का आज के परिदृश्य में आकलन करें, तो लगता है कि यह देश दुनिया से अलग-थलग किसी दूसरे ग्रह पर बसा देश है. जब नरपिशाचों के देश पाकिस्तान द्वारा पालित जिंदा राक्षस मौलाना मसूद अजहर के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के द्वारा सीआरपीएफ के 40 […]

कन्फूशियस जैसे उदात्त चरित्र वाले दार्शनिक के देश चीन के चरित्र का आज के परिदृश्य में आकलन करें, तो लगता है कि यह देश दुनिया से अलग-थलग किसी दूसरे ग्रह पर बसा देश है.
जब नरपिशाचों के देश पाकिस्तान द्वारा पालित जिंदा राक्षस मौलाना मसूद अजहर के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के द्वारा सीआरपीएफ के 40 जवानों की हत्या से संपूर्ण मानवता कराह उठी है, दुनियाभर के देशों ने एक सुर में इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा और भर्त्सना की है, चीन पर उसका कोई असर नहीं दिखा.
भारत द्वारा मौलाना मसूद अजहर को ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी’ घोषित करने के प्रयास को इकलौते चीन ने अपने वीटो पावर से विफल कर दिया. चीन ने एक बार नहीं, बल्कि दो बार ऐसा किया है. भारत को भी अब चीन से सभी तरह के अपने संबंधों पर पुनर्विचार करना चाहिए. इतिहास साक्षी है, चीन ने भारत के जख्मों पर हमेशा नमक छिड़का है.
निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

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