कन्याओं के मान-सम्मान व उच्च शिक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का अभियान शुरू किया था. हालांकि जिनके पास बेटी है, वह उसकी अहमियत को समझ नहीं पाते. घर से दूर पढ़ने-लिखने के लिए नहीं भेज पाते हैं. जिनके पास बेटी नहीं है, वह लालायित रहते हैं.
हमारे देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी महिला लड़की ही हैं. अगर उन्हें भी बंदिशों का सामना करना पड़ता तो क्या वह आज देश की रक्षा मंत्री की कुर्सी पर होतीं? आज के दिन नकारात्मक सोच की कोई कमी नहीं रही, जिधर देखो रेप की घटनाएं सामने आती हैं.
इस का नतीजा है कि कई लोग तो लड़कियों को घर से निकलने तक नहीं देते हैं. इसे देखते हुए एक बड़े सामाजिक बदलाव की जरूरत है और यह तभी संभव है, जब लोग जागरूक होंगे. इसलिए व्यापक पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.
प्रियेश कुमार, पतौरा (मोतिहारी)
