और भी विकल्प थे रेल भाड़ा बढ़ाने के

अच्छे दिन लाने का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार ने रेल किराये मे अभूतपूर्व बढ़ोतरी कर देश की जनता को एक झटका दे दिया. सरकार का यह फैसला कई सवाल खड़े करता है. रेल की माली हालत को जानते हुए भी आपने कभी कांग्रेस शासन के दौरान किराया बढ़ाने का समर्थन नहीं किया. आपका कहना […]

अच्छे दिन लाने का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार ने रेल किराये मे अभूतपूर्व बढ़ोतरी कर देश की जनता को एक झटका दे दिया. सरकार का यह फैसला कई सवाल खड़े करता है. रेल की माली हालत को जानते हुए भी आपने कभी कांग्रेस शासन के दौरान किराया बढ़ाने का समर्थन नहीं किया. आपका कहना है कि ये कांग्रेस के प्रस्ताव थे, तो जब उनकी ही नीतियां लागू करनी हो तो आपका क्या काम!

सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं लेकिन इतना बड़ा फैसला बिना किसी बहस के एकतरफा कर देते हैं वह भी संसद सत्र शुरू होने के महज चंद दिनों पहले. अब दूसरे दलों, खासकर विपक्ष की भूमिका देखें जो सकारात्मक होने का दावा तो करती है लेकिन विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए करती है. वे महंगाई कम करने का या देश के खजाने को भरने का कोई समाधान नहीं सुझाते. इस कड़े कदम को उठाने के पहले कई ऐसे काम किये जा सकते थे जो अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होते. अमीरों के विलासिता की वस्तुएं-एसी, फ्रीज, कार, दुपिहया, शराब, सिगरेट आदि के दाम क्यों नहीं बढ़ाए जाते? आज एक मध्यम वर्ग के घर में एक से ज्यादा टीवी और कई मोबाईल फोन हैं.

स्मार्ट फोन सस्ते हो रहे हैं. कॉल टैरिफ और इंटरनेट सस्ता है. रोमिंग फ्री करने की योजना है. अधिसंख्य गरीबों के देश में इन चीजों के दाम बढ़ने से अधिकांश लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी. इसलिए सरकार से आग्रह है कि गरीबों के थाली से निवाला छीनने के पहले दूसरे सभी उपायों पर भी विचार करें. आपकी नीतियां साधन संपन्न मध्यम वर्ग या उच्च वर्ग के लिए न होकर गांधीजी के शब्दों में-अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को देख कर बननी चाहिए.

राजन सिंह, जमशेदपुर

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