संसद लोकतंत्र का प्रतीक है. संसद देश के लिए नये कानून बनाता और पुराने कानूनों में जरूरत के हिसाब से संशोधन करता है. पिछले कुछ वर्षों में देखने में आ रहा है कि लगातार सदन के कामकाज में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है.
वर्तमान शीतकालीन सत्र जो 20 दिनों का है, पिछले 11 दिसंबर को शुरू हुआ था. दो जनवरी तक निचले सदन में महज 33 एवं ऊपरी सदन में सिर्फ पांच प्रतिशत काम हुआ. सत्ता पक्ष विपक्ष को एवं विपक्ष सत्तापक्ष को इसका जिम्मेवार बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं. मगर हकीकत यही है कि दोनों इसके लिए जिम्मेवार हैं.
जो अभी सत्ता में है वे पूर्व में यही किया करते थे और जो उस समय सत्ता में थे वे आज बदला ले रहे हैं. ऐसे में देश नहीं चलेगा. इस समय एक साल में 85 दिन के लिए सदन चलता है, इसकी कार्यावधि को बढाकर कम से कम 110 दिन किया जाना चाहिए, ताकि व्यवधानों की कुछ तो भरपाई की जा सके.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर
