स्कूलों का विलय

इस वर्ष कई स्कूलों का विलय किया गया, जिसका कोई स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हुआ. सबसे ज्यादा चिंता और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि ऐसी-ऐसी जगहों के स्कूल को बंद किये गये हैं, जहां स्कूल होना ही बहुत बड़ी बात है. जंगली क्षेत्रों में कई ऐसे स्कूल चल रहे थे और अब वहां […]

इस वर्ष कई स्कूलों का विलय किया गया, जिसका कोई स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हुआ. सबसे ज्यादा चिंता और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि ऐसी-ऐसी जगहों के स्कूल को बंद किये गये हैं, जहां स्कूल होना ही बहुत बड़ी बात है.

जंगली क्षेत्रों में कई ऐसे स्कूल चल रहे थे और अब वहां सबका विलय हो चुका है. कोई सरकारी मदद नहीं पहुंचती है उन सभी जगहों पर. हां, कुछ अच्छे टीचर जरूर हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के पेड़ के नीचे भी पाठशाला चला रहे हैं, ताकि बच्चे को शिक्षा दी जा सके.

सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि राज्य के दूर-दराज के सभी बच्चों की स्कूल तक पहुंच हो. आखिर शिक्षा तो शिक्षा होती है. जहां बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं, उन जगहों पर सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूल भवन हो, चाहे उसे बनाना ही क्यों न पड़े. गांवों में सिर्फ बिजली पहुंचाने से ही काम नहीं चलेगा. किसानों को टैबलेट या स्मार्टफोन देने से बेहतर है कि समाज में अच्छे स्कूल हों.

पालुराम हेंब्रम, इमेल से

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >