पाठ्यक्रम में नैतिकता की पढ़ाई अनिवार्य हो

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में पठन-पाठन को लेकर खूब ख्याल रखा गया है. 21वीं सदी को कंप्यूटर का युग कहा जा रहा है. इसलिए कंप्यूटर की शिक्षा भी गैरसरकारी के अलावा अब सरकारी विद्यालय में दी जा रही है, लेकिन पहले की अपेक्षा अब नैतिकता का पाठ शिक्षकों द्वारा बच्चों को नहीं पढ़ाया जा रहा है, […]

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में पठन-पाठन को लेकर खूब ख्याल रखा गया है. 21वीं सदी को कंप्यूटर का युग कहा जा रहा है. इसलिए कंप्यूटर की शिक्षा भी गैरसरकारी के अलावा अब सरकारी विद्यालय में दी जा रही है, लेकिन पहले की अपेक्षा अब नैतिकता का पाठ शिक्षकों द्वारा बच्चों को नहीं पढ़ाया जा रहा है, जिसके चलते छोटे-छोटे बच्चों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है. बड़ों का आदर-सम्मान करना भूलते जा रहे हैं. यहां तक कि माता-पिता व गुरुजनों में भी कर्तव्य की कमी देखने को मिल रही है.

पहले नैतिकता व खेल का पाठ पाठ्यक्रम तालिका के सबसे अंत में होता था, जिसे बच्चे मन लगाकर पढ़ते थे. लेकिन, वर्तमान में नहीं होने से इसमें कमी देखी जा रही है. इसलिए पुनः वर्तमान पाठ्यक्रम में भी नैतिकता को शामिल कर पढ़ाया जाना चाहिए.

नितेश कुमार सिन्हा, जानपुल चौक (मोतिहारी)

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