धरती के विनाश का आध्यात्मिक आयाम

हिंदू सनातन धर्म वैज्ञानिकता एवं दूरदर्शिता पर आधारित है. इसके कई सबूत उपलब्ध हैं. इसका एक प्रमाण पिछले दिनों गीता के अध्ययन के दौरान पाया. कुछ वर्षो पहले माया सभ्यता के कैलेंडर के आधार पर 21 दिसंबर 2012 को जीवन के विनाश की भविष्यवाणी की गयी थी. मीडिया ने भी इसे खूब उछाला और इस […]

हिंदू सनातन धर्म वैज्ञानिकता एवं दूरदर्शिता पर आधारित है. इसके कई सबूत उपलब्ध हैं. इसका एक प्रमाण पिछले दिनों गीता के अध्ययन के दौरान पाया. कुछ वर्षो पहले माया सभ्यता के कैलेंडर के आधार पर 21 दिसंबर 2012 को जीवन के विनाश की भविष्यवाणी की गयी थी. मीडिया ने भी इसे खूब उछाला और इस पर फिल्म फिल्में भी बनी.

गीता में भगवान ने कहा है कि जब तक शक्तिमान पुरुष अर्थात ईश्वर हैं तब तक उनकी शक्ति यानी प्रकृति का कभी विनाश नहीं हो सकता. यानी दुनिया का विनाश तभी हो सकता है जब इन्हें धारण करने वाले परमपिता का विनाश हो जाये. और गीता में भगवान ने यह भी कहा है कि मैं अनादि, अनंत, नित्य व अविनाशी हूं. भगवान का नाश नहीं हो सकता तो फिर उनके द्वारा रची गयी प्रकृति का भी कभी नाश नहीं हो सकता. ईश्वर में आस्था रखें.

अनंत कुमार,ई-मेल से

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