मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत जवाबदेही

।। डॉ भरत झुनझुनवाला ।। अर्थशास्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त न तो शास्त्रीजी ट्रेन के ड्राइवर थे और न ही सिग्नल ऑपरेटर. अब यूपी की घटनाओं में सीएम को जिम्मेवार ठहराना उचित है. उत्तर प्रदेश के हालात […]

।। डॉ भरत झुनझुनवाला ।।

अर्थशास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री ने एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त न तो शास्त्रीजी ट्रेन के ड्राइवर थे और न ही सिग्नल ऑपरेटर. अब यूपी की घटनाओं में सीएम को जिम्मेवार ठहराना उचित है.

उत्तर प्रदेश के हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं. लड़कियों का रेप करके उन्हें फांसी देना आम बात हो गयी है. इन घटनाओं में मुख्यमंत्री सीधे लिप्त नहीं हैं, परंतु समाज के दबंगों का हौसला बुलंद है. राज्य का पूरा कानून-तंत्र चरमरा गया है. यह विषय किसी भी संगठन के प्रमुख की जवाबदेही का है. हर संगठन का एक दर्शन होता है. संगठन के कर्मचारी उसका अनुकरण करते हैं. इसे ऐसे समझते हैं..

दक्षिण कोरिया की विशालकाय सैमसंग कंपनी पर किसी भारतीय कंपनी के मालिक शेख अलाउद्दीन ने आठ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा ठोका था. गाजियाबाद के न्यायालय ने हुन ली को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है. भारत के क्रिमिनल कानून में ऐसी व्यवस्था है. सैमसंग ने सुप्रीम कोर्ट से इस वाद को खारिज करने की गुहार लगायी थी. सुप्रीम कोर्ट ने सैमसंग की याचिका को अस्वीकार कर दिया. हुन ली की संपत्ति लगभग 66 हजार करोड़ रुपये है. पूरे छत्तीसगढ़ राज्य की वार्षिक आय के बराबर इनकी संपत्ति है. इतने अमीर व्यक्ति के लिए गाजियाबाद के न्यायालय में मुकदमे में पेश होना शर्मनाक है.

पिछले दिनों सहारा इंडिया के मालिक सुब्रत राय को जेल भेज दिया था. वह मामला तुलना में हलका था. सहारा ने किसी हाउसिंग योजना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये जनता से जमा लिये थे. भारतीय शेयर बाजार के रेग्युलेटर सेबी के अनुसार यह रकम जमा करने के पूर्व सहारा को अनुमति लेनी चाहिए थी. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राय को जेल भेज दिया. दोनों मुकदमों में कंपनी के मुख्याधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर कंपनी के कार्यकलापों के लिए जिम्मेवार माना गया है. वैश्विक मानकों पर हुन ली को व्यक्तिगत रूप से कंपनी के कार्यो के लिए जिम्मेवार ठहराया जाना उचित दिखता है.

2001 में अमेरिकी तेल कंपनी एनरान दिवालिया हो गयी. सौदों में कंपनी को घाटा लगा, परंतु कंपनी के मुख्याधिकारी केनेथ ले ने खातों में उलटफेर करके इन घाटों को छुपाये रखा. कंपनी का दिवाला निकल गया. अमेरिकी अदालत ने केनेथ को जेल भेज दिया. इस मामले पर यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के प्रो फेरैल लिखते हैं, ‘सरकारी अधिकारियों, न्यायालयों एवं दूसरे लोगों में सहमति बनी है कि कंपनी के खातों, ईमानदारी एवं कानूनी मुद्दों के लिए कंपनी के मुख्याधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार हैं.’

केनेथ ले द्वारा अपने कर्मियों पर लाभ कमाने का बेहद दबाव बनाया गया था. लेकिन खातों में पारदर्शिता पर जोर नहीं दिया गया. फलस्वरूप युवा कर्मियों द्वारा अनुचित रिस्क उठायी गयी और घाटा हुआ. इसमें केनेथ का सीधे हाथ नहीं था, फिर भी उन्हें जेल भेजा गया, चूंकि कंपनी का यह चरित्र उनकी देन था.

ग्रीनपीस के अनुसार भोपाल त्रसदी की जड़ में यूनियन कार्बाइड द्वारा अधिक लाभ कमाने का प्रयास था. यूरोप में जहरीली एमआइसी गैस का एक स्थान पर आधे टन का अधिकतम भंडारण किया जा सकता है. भोपाल में 67 टन का भंडारण किया गया था. न्यून तापमान पर इसका भंडारण करना होता है. लेकिन पैसा बचाने के लिए एयर कंडीशन प्लांट में तथा रखरखाव के लिए नियुक्त कर्मियों की संख्या में कटौती की गयी.

इन निर्णयों में कंपनी के मुख्याधिकारी वारन एंडरसन का सीधा हाथ नहीं था. फिर भी हमारे सुप्रीम कोर्ट ने एंडरसन के विरुद्घ क्रिमिनल मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया था, चूंकि कंपनी के कार्यकलापों के पीछे एक फिलॉसफी होती है, जिसके लिए मुख्याधिकारी जिम्मेवार होता है.

पिछले साल उत्तराखंड में लगभग 10,000 लोग मारे गये थे. इस त्रसदी को बनाने में टिहरी हाइड्रोपावर कॉरपोरेशन की विशेष भूमिका दिखती है. टिहरी की विशालकाय झील से जून में भारी मात्र में वाष्पीकरण हुआ था. यह वाष्प केदारनाथ के ऊपर बादल फूटने के रूप मे गिरी. वर्षा में भारी वृद्घि हुई, जिसको केदारनाथ की पहाड़ियां सहन नहीं कर सकीं. मैं समझता हूं कि सैमसंग, सहारा, एनरान तथा यूनियन कार्बाइड के मामलों में मुख्याधिकारी की जो जिम्मेवारी तय की गयी है, उसे इन कंपनियों पर भी लागू करना चाहिए.

जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे, तो उनके कार्यकाल में कोई रेल दुर्घटना हुई, इस पर नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए आपने इस्तीफा दे दिया. न तो शास्त्रीजी ट्रेन के ड्राइवर थे और न ही सिग्नल ऑपरेटर. सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती, तो संभवत: दुर्घटना नहीं होती. लेकिन लाभ कमाने या ट्रेन के समय से पहुंचने को प्राथमिकता देने से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है. इसी सिद्घांत को उत्तर प्रदेश के वर्तमान हालात पर लागू करना चाहिए. लड़कियों को फांसी देने की घटनाओं में मुख्यमंत्री व्यक्तिगत स्तर पर लिप्त नहीं हैं, परंतु पूरे शासन-तंत्र की फिलॉसफी से ये घटनाएं हो रही हैं. अत: इन घटनाओं के लिए मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार ठहराया जाना उचित दिखता है.

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