वोट की कीमत

चुनाव का मौसम सर पर है. हर पार्टी के लोग एक दूसरे को बुरा भला कह रहे हैं. बयानबाजी की सारी सीमाएं टूट रही हैं. बहुत सारे मुद्दों का उभरना शुरू हो गया है. ऐसा लग रहा है कि भारत एक ऐसा देश है, जहां समस्याओं की कमी नहीं है. यहां चुनाव एक खेल जैसा […]

चुनाव का मौसम सर पर है. हर पार्टी के लोग एक दूसरे को बुरा भला कह रहे हैं. बयानबाजी की सारी सीमाएं टूट रही हैं. बहुत सारे मुद्दों का उभरना शुरू हो गया है.
ऐसा लग रहा है कि भारत एक ऐसा देश है, जहां समस्याओं की कमी नहीं है. यहां चुनाव एक खेल जैसा बन गया है जहां एक दूसरे पर कीचड़ उछालने में नेता लगे रहते हैं. अपशब्द बोलने में भी नहीं झिझक रहे हैं. साफ लगता है कि जनता अभी तक अपने मत के अधिकारों को समझ नहीं पायी है. लोग लालच में आकर मतदान कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में हो रहे चुनाव के दौरान पुलिस ने शराब की कई बोतलें जब्त की हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि लोग अपना भविष्य की कीमत शराब से लगा रहे हैं. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जनता अपना वोट कुछ पैसों के लिए बेचते रहे तो आने वाले समय में देश की स्थिति नाजुक हो जायेगी. लोगों को अपने वोट की कीमत को पहचानने की जरूरत है, ताकि सूझ-बूझ के साथ अच्छे नेता को चुना जा सके जिससे देश और समाज का विकास हो सके.
अभिजीत मेहरा, गोड्डा

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