लापरवाही का नतीजा

जहां पूरा देश विजयादशमी का उत्सव मना रहा था, वहीं अमृतसर के जोड़ा फाटक के नजदीक उत्सव मातम में बदल गया. 60 से भी अधिक लोग रावण दहन देखने के क्रम में ट्रेन के शिकार होकर काल कवलित हो गये. कुछ तो आयोजकों की लापरवाही और कुछ रेलवे की असतर्कता के नतीजे के कारण यह […]

जहां पूरा देश विजयादशमी का उत्सव मना रहा था, वहीं अमृतसर के जोड़ा फाटक के नजदीक उत्सव मातम में बदल गया. 60 से भी अधिक लोग रावण दहन देखने के क्रम में ट्रेन के शिकार होकर काल कवलित हो गये.
कुछ तो आयोजकों की लापरवाही और कुछ रेलवे की असतर्कता के नतीजे के कारण यह घटना हुई. लोग भी सतर्क नहीं थे. उन्हें रेलवे ट्रैक पर खड़ा नहीं होना चाहिए था. अब एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चालू हो गयी है, यह और भी दुखद है.
जहां एक तरफ क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू से इस घटना पर संवेदना की अपेक्षा थी, वहीं उनका यह बयान कि यह घटना कुदरत का कहर है, और भी दुखी कर गया. राजनेताओं को ऐसे बयान से बचना चाहिए. इस घटना से सीख लेते हुए कोशिश यह होनी चाहिए कि कभी भी भीड़ एकत्रित करने वाले आयोजन रेलवे ट्रैक, सड़क आदि के किनारे नहीं करने चाहिए.
सत्येंद्र कुमार पांडेय, नामकुम, रांची

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