आरक्षण पर आत्ममंथन

रांची में एक कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अपने भाषण में कहा कि जो लोग आरक्षण का लाभ पाकर आगे बढ़ गये, वे आत्ममंथन करें और अपने वर्ग के लोगों के लिए इसका त्याग करें. सुनने में यह बात तार्किक लग सकती है. लेकिन इसे विस्तार से समझना चाहिए. आजादी के बाद हाशिए […]

रांची में एक कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अपने भाषण में कहा कि जो लोग आरक्षण का लाभ पाकर आगे बढ़ गये, वे आत्ममंथन करें और अपने वर्ग के लोगों के लिए इसका त्याग करें. सुनने में यह बात तार्किक लग सकती है. लेकिन इसे विस्तार से समझना चाहिए. आजादी के बाद हाशिए पर रखे गये वर्ग को समानता देने के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था की गयी.
आज कितने ही सरकारी प्रतिष्ठानों में पूर्व कर्मचारियों के बच्चों के लिए आरक्षण दिया जा रहा है. यहां उनके आरक्षण का कोई मतलब नहीं है. कहने का आशय यह है कि संविधान सम्मत इस आरक्षण पर पुनर्विचार करने या सिर्फ इसकी समीक्षा करने की बजाय हर तरह के आरक्षण पर चर्चा होनी चाहिए. वरना लोग भ्रमित होंगे और उनमें असंतोष जागेगा.
राजन सिंह, रांची

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