जाति धर्म के नाम पर समाज में फैलता जहर

छुआछूत, भेदभाव और ऊंच-नीच जैसी चीजें देश व समाज के विकास में बाधक हैं. हमें छुआछूत, भेदभाव, ऊंच-नीच को खत्म कर जातियों में बंटे हुए जनसमूहों को एक सभ्य समाज में बदलना होगा. नागरिक समूह के द्वारा जन जागृति अभियान चलाये जाने चाहिए. जो नियम-कानून इन सामाजिक समस्याओं के खिलाफ बने हुए हैं, उन्हें सरकार […]

छुआछूत, भेदभाव और ऊंच-नीच जैसी चीजें देश व समाज के विकास में बाधक हैं. हमें छुआछूत, भेदभाव, ऊंच-नीच को खत्म कर जातियों में बंटे हुए जनसमूहों को एक सभ्य समाज में बदलना होगा. नागरिक समूह के द्वारा जन जागृति अभियान चलाये जाने चाहिए. जो नियम-कानून इन सामाजिक समस्याओं के खिलाफ बने हुए हैं, उन्हें सरकार व प्रशासन से ईमानदारी के साथ लागू कराना होगा.

जनता को चाहिए कि जो राजनीतिक दल व राजनेता जाति धर्म के नाम पर द्वेष फैलाने का काम करते हैं, समाज में जहर उगलते है, उन्हें अपने मत की ताकत से सबक सिखाएं. साथ ही जातीय व धार्मिक आधार पर समाज में जहर फैलाने वाले संगठनों को कड़े नियम बनाकर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. तब जाकर देश व समाज का कल्याण हो सकता है.

हरेंद्र सिंह कीलका, सीकर

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