प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु शिक्षा विभाग द्वारा लगभग दो दशक के दरम्यान अनेक परियोजनाएं चलायी गयीं, परंतु कोई अपेक्षित लाभ मिल नहीं सका. किसी बीमारी का वास्तविक कारण जाने बिना सिर्फ एंटीबायोटिक खिलाने से मरीज का सही इलाज नहीं हो सकता है.
मैं सरकार को सुझाव देना चाहूंगा कि यदि सरकारी विद्यालयों में नर्सरी, केजी जैसी पूर्व प्राथमिक कक्षाओं को जोड़ दिया जाए, बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए अभिभावकों को जवाबदेह बना दिया जाए तथा पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था कर दी जाए, तो शिक्षा की गुणवत्ता में स्वतः सुधार हो जायेगा और तब पहल, बुनियाद या ज्ञान सेतु जैसे एंटीबायोटिक माड्यूल्स की जरूरत नहीं पड़ेगी.
सुनील कुमार झा, देवघर
