शर्मनाक है भूख से मौत

दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियों की भूख से मौत एक शर्मनाक घटना है. जहां हम 21वीं सदी में नया इंडिया बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं देश की राजधानी में बच्चों की मौत भूख से हो रही है. भुखमरी की रैंकिंग में एक-दो अंक सुधार होने पर नेताओं और सरकारों में श्रेय […]

दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियों की भूख से मौत एक शर्मनाक घटना है. जहां हम 21वीं सदी में नया इंडिया बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं देश की राजधानी में बच्चों की मौत भूख से हो रही है. भुखमरी की रैंकिंग में एक-दो अंक सुधार होने पर नेताओं और सरकारों में श्रेय लेने की होड़ मच जाती है, लेकिन ऐसी घटना के बाद जिम्मेदारी लेने से भागते नजर आते हैं.
पिछली वर्ष अक्तूबर में झारखंड के सिमडेगा में एक महिला का राशन कार्ड आधार से जुड़ा न होने की वजह से उसके परिवार को सरकारी राशन मिलना बंद हो गया था. वह स्कूल के मिड डे मिल का खाना खाकर गुजारा कर रही थी, लेकिन दुर्गा पूजा की छुट्टियों में स्कूल बंद होने से खाना मिलना भी रुक गया था और उसकी मौत हो गयी थी.
सरकार को ऐसे डीलरों पर तुरंत कार्रवाई कर लाइसेंस रद्द करना चाहिए, ताकि समाज में संदेश जाये कि गरीबों का हक खाने वाले लोगो की सिस्टम में कोई जगह नहीं है. भारत के दुनिया में छठी अर्थव्यवस्था और बिजनेस करने की रैंकिंग में सुधार जैसी बातों पर पीठ थपथपाने से पहले भोजन जैसी बुनियादी बातों पर बल देने की आवश्यकता है.
महेश कुमार, इमेल से

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