नदियों की स्वच्छता के लिए सरकार लगातार अभियान चला रही है, लेकिन इसमें अगर हम नागरिक भी कुछ सहयोग करें तो काम की रफ्तार में थोड़ी वृद्धि होगी व सरकार को इस बात की खुशी होगी कि अभियान में जनता हमारे साथ है. हमें यह सोचना होगा कि नदियां ही जीव-जंतु, पशु-पक्षी व हमारे खेतों की प्यास बुझाती है. इसके बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, फिर भी हम नदियों में पॉलीथिन व अन्य कचरे डालकर इसके पानी को दूषित कर रहे हैं.
इतिहास गवाह है कि जितनी भी सभ्यताओं का विकास हुआ वह नदियों के तट पर ही हुआ है. कारण कि नदियों से केवल पीने का पानी ही नहीं मिलता है, बल्कि यह आवागमन व व्यवसाय का सुगम मार्ग भी रहा है. इसलिए नदियों की उपेक्षा मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
प्रियांशू उर्फ सौरभ, बगौरा (सीवान)
