जलालाबाद में सिखों व हिंदुओं को आत्मघाती हमले का शिकार बनाने का काम चाहे जिस आतंकी समूह ने किया हो, यह साफ है कि उसका मकसद अफगानिस्तान सरकार के साथ-साथ भारत की सरकार को भी कोई संदेश देना था.
पाकिस्तान को अफगानिस्तान में भारत की सक्रियता रास नहीं आ रही, क्योंकि वह काबुल में अपनी कठपुतली सरकार चाहता है और उसे लगता है कि भारत इसमें बाधक है. पाकिस्तान की इस सोच के पीछे एक बड़ी वजह अफगानिस्तान को अपनी जागीर के तौर पर देखना है. यदि पाकिस्तान की पहली सनक भारत को नीचा दिखाना है तो दूसरी सनक अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में देखना
इसी कारण वह तालिबान सरीखे खूंखार तत्वों को अपना सहयोग, समर्थन और संरक्षण दे रहा है. अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर चिंतित अमेरिका सहित सभी देश जलालाबाद की आतंकी घटना का संज्ञान लें. सभी देशों को यह भी देखना चाहिए कि कहीं पाकिस्तान आतंक का नये सिरे से निर्यात तो नहीं कर रहा है?
डॉ हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर
