मोदी जी, आप को प्रधानमंत्री के रूप में कोटि-कोटि नमन और बधाई. देश के लिए आपके समर्पण और निष्ठा को भी नमन. आपने अपने करीब साल भर के भाषणों में लगभग हर समस्या के समाधान की बातें कीं.
मैं आपका ध्यान हमारे साहित्यकारों की ओर दिलाना चाहूंगा. इन्हें सम्मान बहुत देर से मिलता है, इसलिए युवा साहित्यकार लेखन की प्रतिभा रहते हुए भी लेखन की ओर अग्रसर नहीं हो पा रहे हैं. रोजी-रोटी की समस्या में कई रचनाकार दब कर रह जाते हैं. कोई भी लेखन को लेकर अपने जीवन में संपूर्ण रूप से अग्रसर नहीं होना चाहता.
बड़े से बड़ा लेखक भी सम्मान पाते-पाते अपनी जिंदगी के आकखरी मोड़ तक चला आता है. श्रीलाल शुक्ल जी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार उस वक्त मिलता है जब वे मरणासन्न थे. अत: आपसे आग्रह है कि साहित्यकारों पर भी नजर-ए-इनायत करें.
सत्य प्रकाश भारतीय, कोलकाता
