किसानों का दर्द

किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात परवान पर है. झारखंड के किसानों की नाउम्मीदियां परवान चढ़ने को आतुर. आद्रा का वर्षा भी सरकार के बीज वितरण नीति पर असर नहीं डाल सका है. जब किसान पेट मारकर बीज बो लेंगे, तब जाकर कृषि विभाग की नींद टूटेगी. समय से कुछ मिलना नहीं है. इस्राइल […]

किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात परवान पर है. झारखंड के किसानों की नाउम्मीदियां परवान चढ़ने को आतुर. आद्रा का वर्षा भी सरकार के बीज वितरण नीति पर असर नहीं डाल सका है. जब किसान पेट मारकर बीज बो लेंगे, तब जाकर कृषि विभाग की नींद टूटेगी.
समय से कुछ मिलना नहीं है. इस्राइल जाकर किसान जो कुछ सीखेंगे उसका अनुपालन ऐसे में कैसे होगा? अंततः किसानों के असली मलिक खुदा तो है ही. वैसे मोदीजी की आय दोगुनी के विचार अच्छे हैं और सच लगते भी हैं. समय से बड़ी सरकार है, पर किसान समय के मारे हैं.
झारखंड मे खेती बारी की बात ही बेकार है. यहां तो सब लूटने में ही मगन हैं. फिर भी कुछ लोग हैं जो आज भी किसानी पर ही फिदा है. किसानी होनी भी चाहिए और समय पर खाद बीज अनुदान पर आपूर्ति होनी चाहिए. इस पर झारखंड सरकार को विचार करना चाहिए.
प्रदीप कुमार सिंह, बड़की पोना, रामगढ़

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