भारतीयों को लूट रही हैं विदेशी कंपनियां

आज भी हमारा देश आजाद नहीं हैं. मेरा संकेत आर्थिक व सांस्कृतिक गुलामी की ओर है. इसमें हम शिक्षा को भी जोड़ सकते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि ये गुलामी उस गुलामी से कहीं अधिक हानिकारक है, जिससे हमने स्वतंत्रता पायी थी. परंतु, यह गुलामी भी उसी गुलामी की उपज है. यह एक मानसिक […]

आज भी हमारा देश आजाद नहीं हैं. मेरा संकेत आर्थिक व सांस्कृतिक गुलामी की ओर है. इसमें हम शिक्षा को भी जोड़ सकते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि ये गुलामी उस गुलामी से कहीं अधिक हानिकारक है, जिससे हमने स्वतंत्रता पायी थी. परंतु, यह गुलामी भी उसी गुलामी की उपज है. यह एक मानसिक गुलामी है, जो दिन पर दिन हमारे देश, समाज व हमारे चरित्र को खोखला कर रही है.
यदि हम बातें करें आर्थिक गुलामी कि तो यहां पर हम पूर्ण रूप से गुलाम हो चुके हैं. आज भारत को न जाने कितनी ही विदेशी कंपनियां लुटने का कार्य कर रही हैं और हमारे देश के लोगों का प्रयोग करके हमारे ही घर में डाका डाल रही है. मैं लोगों से अपील करता हूं कि कोई भी विदेशी कंपनी का उत्पाद न खरीदें और अपने देश को आर्थिक गुलाम होने से बचाएं.
श्रीराम, पंचदेवरी (गोपालगंज)

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