वोट बनाम भारत की स्थिति

2014 के लोकसभा चुनाव की सीधी जंग किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं बल्कि खुद भारत के भविष्य से है. भारत देश स्वयं अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रहा है. उन लोगों से जो वोट डालने के बावजूद अपने नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों को सही ढंग से निर्वाह नहीं करते हैं. ये वोट […]

2014 के लोकसभा चुनाव की सीधी जंग किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं बल्कि खुद भारत के भविष्य से है. भारत देश स्वयं अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रहा है. उन लोगों से जो वोट डालने के बावजूद अपने नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों को सही ढंग से निर्वाह नहीं करते हैं.

ये वोट बनाम भारत है. पूरे भारत में वोट करें देश गढ़ें, वोट करें चोट करें के नारे लगाये जा रहे हैं. मतदान अवश्य करें, यह हमारा अधिकार है. लेकिन क्या केवल यही हमारा अधिकार है? मतदान के बाद भारत फिर लाचार हो जाता है, क्योंकि कोई राजनीतिक पार्टी इसके लिए कुछ नहीं करती. लेकिन अब भारत की लड़ाई सीधे तौर पर उन लोगों से है जिन्होंने वोट डालने के बावजूद भारत को अस्तित्वहीन रखा है. जल्द ही भारत एक ऐसा संविधान रचेगा, जिसे कोई संसद बदल नहीं सकेगी और जिस पर पूरे देश को नाज होगा.

संजय कु सिंह, मुनीडीह, धनबाद

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