चुनाव के बाद भी जनता की सुनें नेताजी

देश के कई क्षेत्रों में चुनाव अब खत्म हो गये हैं. इन जगहों पर अब शांति है. समझ में यह नहीं आता कि चुनाव खत्म होने के बाद और चुनाव जीतने के बाद नेता दिखायी क्यों नहीं देते. ऐसे क्यों भाई? यह तो बहुत गलत बात है. नेताओं को सोचना चाहिए कि अगर वो चुनाव […]

देश के कई क्षेत्रों में चुनाव अब खत्म हो गये हैं. इन जगहों पर अब शांति है. समझ में यह नहीं आता कि चुनाव खत्म होने के बाद और चुनाव जीतने के बाद नेता दिखायी क्यों नहीं देते. ऐसे क्यों भाई? यह तो बहुत गलत बात है. नेताओं को सोचना चाहिए कि अगर वो चुनाव के बाद भी लोगों से मिलते-जुलते हैं तो कितना अच्छा होगा.

जिस तरह वोट से पहले घर-घर जा कर दूसरों का दु:ख-दर्द पूछते हैं, अगर जीतने के बाद भी ऐसे ही आते रहे तो क्या होता? ऐसे ही लगातार अपना काम करते रहे तो क्या होता? होता यह कि चुनाव के समय उन्हें हाथ फैला कर वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ती. लोग आंख मूंद कर उन्हें ही चुनते. नेतागण राजनीति और जोड़-तोड़ में इतना दिमाग लगाते हैं, उतना दिमाग अगर क्षेत्र की जनता के बीच मेल-जोल बढ़ाने में लगायें, तो सबका भला हो!

पालुराम हेंब्रम, सालगाझारी

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