अरविंद केजरीवाल भले वाराणसी में नरेंद्र मोदी को टक्कर दे रहे हों और उनकी पार्टी के अन्य नेता भी कई दिग्गजों के खिलाफ चुनाव लड. रहे हों, लेकिन देश चलाना एक भारी जिम्मेदारी है और देश की बागडोर अनुभवी हाथों में ही होनी चाहिए.
नरेंद्र मोदी 12 वर्षो के सफल प्रशासक रहे हैं, गुजरात में उनका रिकॉर्ड उम्दा है. उनकी उपलब्धियों का कोई अंत नहीं है. उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है. दूसरी तरफ केजरीवाल की उपलब्धियां धरना-प्रदर्शन, दूसरों पर एकतरफा आरोप लगाने तक ही सीमित हैं. आरोप उन्होंने बहुत लगाये, पर न किसी के खिलाफ सिद्ध कर पाये और न अदालत गये. नयी पार्टी बना कर बदलाव की उम्मीदें जरूर जगा दी, लेकिन जिस तरह इन्होंने सोमनाथ भारती और राखी बिड.ला का बचाव किया, वह निराशाजनक था. ऐसे में वह मोदी को टक्कर नहीं दे पायेंगे.
आनंद मिश्र, रांची
