चीन से बढ़ता हस्तक्षेप

चीन को आज एक महाशक्ति के समकक्ष तो माना ही जाता है. सबसे बड़ा आबादी वाला देश, सबसे बड़ा सैन्य शक्ति. धार्मिक कट्टरपंथ एवं आतंकवाद के खतरों से कोसों दूर. आज अमेरिका को भी ठेंगा दिखला रहा है. इसकी इतनी ताकत का राज इसकी आर्थिक सुदृढ़ता एवं अधिनायकवादी शासन पद्धति है. बंगाल की खाड़ी एवं […]

चीन को आज एक महाशक्ति के समकक्ष तो माना ही जाता है. सबसे बड़ा आबादी वाला देश, सबसे बड़ा सैन्य शक्ति. धार्मिक कट्टरपंथ एवं आतंकवाद के खतरों से कोसों दूर. आज अमेरिका को भी ठेंगा दिखला रहा है.
इसकी इतनी ताकत का राज इसकी आर्थिक सुदृढ़ता एवं अधिनायकवादी शासन पद्धति है. बंगाल की खाड़ी एवं हिंद महासागर के आस पास के देशों को इसने अपने प्रभाव में लेना शुरू कर दिया है. डरा कर या लालच देकर अपने पक्ष में कर रहा है. इसलिए शायद वो दुनिया में किसी से नहीं डरता. वो खुलेआम हर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध करता है. भारत केवल रूस, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी तथा इस्राइल आदि देशों के साथ रक्षा सौदा कर लेने से चीन का मुकाबला नहीं कर सकता है.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी

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