भीड़ द्वारा हो रही हत्याएं बहुत ही दर्दनाक है. उस भीड़ का शिकार मैं या आप में से कोई भी हो सकता है. वह भीड़ निर्दयी होती है. वह भीड़ घरों में मातम ला सकती है. ऐसी भीड़ इंसानियत का गला घोट रही है. लेकिन क्या यह भीड़ सिर्फ अखलाक, पहलू या जुनैद को शिकार बनाती है? तो ऐसा नहीं है. वह भीड़ डॉक्टर नारंग को भी शिकार बनाती है.
वह भीड़ रिक्शा चालक रविंदर को भी शिकार बनाती है. वही भीड़ डायन के अफवाह में उस बुजुर्ग औरत को भी शिकार बनाती है. वही भीड़ बच्चा चोरी के अफवाह में उन लड़कों को भी अपना शिकार बनाती है. डीएसपी अयूब पंडित भी उसी भीड़ का शिकार बनते हैं. इस भीड़ का कोई चेहरा नहीं है. न वह हिंदू होती है, न मुसलमान. वह भीड़ निर्दयी व कातिल होती है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए कि भीड़ कानून से ऊपर न हो पाये.
अभिषेक राज, इमेल से
