आजकल की खबरों से साफ है कि भारत में बाल अपराधों का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. बच्चों में हिंसक प्रवृति बढ़ी है. उनमें इंटरनेट और मोबाइल का प्रयोग बेतहाशा बढ़ गया है. छोटे-छोटे बच्चे भी मोबाइल में और इंटरनेट में घुसे रहते हैं. ऐसे में सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण के लिए जरूरत है कि बच्चों को एक बार फिर से ज्ञानवर्धक किताबों के साथ जोड़ने का.
नैतिक शिक्षा को सिलेबस का एक अभिन्न अंग बनाया जाये. बच्चों के लिए सामाजिक विषय भी अनिवार्य बनाया जाये, जिसमें उनको समाज के लिए विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाये. सरकार को दूरगामी सोच के तहत प्रयास करना चाहिए ताकि बच्चे की नींव सुदृढ़ हो.
डॉ शिल्पा जैन सुराणा, इमेल से
