तीन जून को लंदन में हुए आतंकवाद की घटना पश्चिमी देशों के लिये एक गंभीर सबक है. थेरेसा मे ने कहा कि यह हमला इंग्लैंड या ब्रिटेन पर नहीं बल्कि पूरे विश्व पर है. अब कुछ देशों को भारत की पीड़ा का अहसास हुआ, जो अभी तक आतंकवाद को गुड या बैड टेरोरिज्म में विभक्त करते थे.
साथ ही वह यह भी कहते थे कि आतंकवाद पीड़ित देशों की समस्या है.आतंकवाद गुड या बैड नहीं होता हैं. विश्व को आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति बना कर इसका सामना करना चाहिए. लेकिन सभी देशों को यह मानना होगा कि आतंकवाद किसी एक या दो देश की समस्या नहीं वरन पूरी मानवता की समस्या है. इससे कोई भी देश कभी भी प्रभावित हो सकता है.
सीमा साही,बोकारो
