प्लास्टिक के खतरे पर छपे विशेष आलेख से बहुत-जानकारियां मिलीं. अगर लोग प्लास्टिक के थैलियों (पॉलिथिन) का इस्तेमाल बंद कर भी दें, तो क्या हम प्लास्टिक से पूर्ण रूप से छुटकारा पा लेंगे? क्योंकि वर्तमान में शैंपू के एक छोटे से पाउच से लेकर पानी की बोतल तक हर सामान प्लास्टिक में ही आता है.
जब प्लास्टिक के इतने भयावह खतरे हैं, तो क्या रवांडा की तरह हम इस पर पूर्ण पाबंदी नहीं लगा सकते? फिर यदि विकल्प में जूट की थैलियों के अलावा कागज के पैकेट के इस्तेमाल को चुनते हैं, तो उसमें भी कम खतरा नहीं है. कागज भी लकड़ी के गत्ते से ही बनता है. वृक्ष रहित कागज जैसे बांस, घास, जूट आदि फाइबर युक्त कागज का उत्पादन करना पड़ेगा. सरकार को इस गंभीर समस्या पर ठोस निर्णय लेने होंगे.
प्रसेनजीत महतो, बासुड़दा, गम्हरिया
