ठेठ बात : उसे पहली बार मारा गया है…

जनता के गुस्से का सामना कर रही सत्ता और मीडिया के लिए यह लेख आईना है. बदलती पीढ़ी अब सवाल पूछने से डरती नहीं, बल्कि सत्ता से सीधे भिड़ने को तैयार है. जानिए क्यों.

क्या यूं ही तुम्हें मारा गया है? बदमिजाज, बदहवास थे वो लोग जिन्होंने तुम्हारे ख़िलाफ नारे लगाए? नहीं. वो होश में थे. उन्होंने तुम्हारी सत्ता को नकार दिया. तुम मजबूर थे अपनी माइक से लोगो-आईडी निकालने के लिए. अपने ब्रांड का नाम छिपाने के लिए. नहीं करते ये बच्चे तुम पर भरोसा.

रोना मत रोओ, तुम्हारी हस्ती खतरे में है दोस्त जिस मास ऑडियंस की शेखी तुम बघारते थे, मुंह पर पानी मारो, वो मास तुम्हारी मांस खिंचने को तैयार है. कोविड से किसान आंदोलन तक, तुम जनता की आवाज़ नहीं बने.

दलीलें, मिसालें तो खूब हैं. पहले भी सत्ता और मीडिया का संबंध ऐसा ही था. जब जिसकी गद्दी, वहां मधुमक्खी का छत्ता, मक्खियां वहीं भिनभिनाती हैं.

पर क्या खूब कही एक लड़के ने. वो पीढ़ी गई साहब जब सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम एसएसपी ऑफिस की चौखट तकती रहती थी. खिड़की पर लगे पर्दे खिसका कर देखने का दुस्साहस नहीं करती थी. अब आपका जिनसे पाला है, वो आंसू-गैस के बुलेट की व्यवस्था है कि नहीं एसएसपी साहब से ही पूछ लेते हैं.

जिस देश में तुम जी रहे थे, वहां सिपाही देखकर किवाड़ सटा दिए जाते थे. जिस देश में तुम्हें रहना है, वहां के बच्चे पुलिस देखकर कहते हैं, अंकल- vaate gunhanghayiyan

फ़र्क़ इतना है कि शास्त्रार्थ करने बैठ गए तो vaate gunhanghayiyan कोई मीम, कार्टून, मसखराबाज़ी नहीं, भगवदगीता के अध्याय 14 (गुणत्रयविभाग योग) का श्लोक 19 है.

नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति। गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति॥

इसका ठेठ मतलब है- हमसे बचके रहना गुरु. वरना बेआबरू करके कूचे से निकाल देंगे.


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लेखक के बारे में

By जनार्दन पांडेय

जनार्दन पांडेय प्रभात खबर डिजिटल में रेजिडेंट एडिटर हैं. पिछले 14 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और न्यूज रूम, डिजिटल रणनीति और ऑडियंस ग्रोथ पर काम कर रहे हैं. इससे पहले वे अमर उजाला, न्यूज18 और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं.

डिजिटल पत्रकारिता में नए प्रयोग, AI, सॉल्यूशन जर्नलिज्म और मीडिया इनोवेशन उनके पसंदीदा विषय हैं. साल 2024 में उन्हें एक्सचेंज4मीडिया के 40 अंडर 40 सम्मान से सम्मानित किया गया. वे इंडो जर्मन जर्नलिज्म कनेक्ट फेलो भी रह चुके हैं.

जनार्दन दो पुस्तकों के लेखक हैं. बिहार विधानसभा चुनाव पर लिखी उनकी पुस्तक 'बिहार जनादेश 2025: NDA की प्रचंड जीत की पूरी कहानी' और "Rewiring Trust in Journalism" हैंडबुक को व्यापक सराहना मिली. वे समय समय पर डिजिटल मीडिया, पत्रकारिता और बदलती तकनीक पर लिखते हैं और पत्रकारों को प्रशिक्षण भी देते हैं। 📩 संपर्क : janardan.pandey@prabhatkhabar.in

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